बिज़नेस : देश में खुदरा महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। जुलाई 2026 में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.45% हो गई, जबकि जून में यह 4.38% रही थी। सरकार ने बुधवार 12 अगस्त को जुलाई के महंगाई के आंकड़े जारी किए। यह लगातार सातवां महीना है जब खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि जुलाई में महंगाई लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के 4% के अनुमान से ऊपर रही।
महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों की कीमतों में इजाफा माना जा रहा है। जुलाई में फूड इंफ्लेशन बढ़कर 5.52% हो गई, जबकि जून में यह 5.32% थी। आलू और प्याज जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के दाम बढ़ने का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ा है। खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने से परिवारों को महीने का खर्च संभालने में पहले के मुकाबले ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
रिटेल महंगाई का आंकड़ा आम उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव का पता चलता है। महंगाई लगातार बढ़ने पर लोगों की खरीदारी क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। खासतौर पर कम और मध्यम आय वाले परिवारों के बजट पर इसका दबाव ज्यादा देखने को मिलता है।
अब आने वाले महीनों में सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नजर रहेगी। अगर खाद्य महंगाई में राहत मिलती है तो कुल खुदरा महंगाई पर भी दबाव कम हो सकता है। वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहने पर महंगाई RBI के लक्ष्य के आसपास बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
